आनंद और खुशियो
गीत रचयित : फादर एस. जे. बर्कमैन्स
Lyricist: Father.S.J. Berchmans
आनंद और खुशियां पिता के,
सन्निधिमे में हरपल जब है रहा,
व्याकुल है क्यों मेरे मन,
चिन्ता में है क्यों हे मेरे प्राण – (2)
- प्रभू के शरण में जो भी आयेंगे,
दोषी न ठहरेगे – (2)
बचायेगा बढ़ाएगा,
बलवान बनायेगा – (2)
व्याकुल … - प्रभू कहता है दास तू है,
मित्र भी तू ही है – (2)
चुनकर तुझको उसने बुलाया,
कभी नही तजेगा – (2)
तुझे कभी नही तजेगा .. - निर्भय होकर तुझे कहना है,
प्रभु है सहायक मेरा – (2)
तुम ना डरोगे तेरे विरोधी,
क्या कर सकते है – (2)
तुझे क्या कर सकते है ..
ANAND AUR KHUSHIYAN
ANAND AUR KHUSHIYAN PITA KE,
SANNIDHI ME HARPAL JAB HAI RAHA,
VYAKUL HAI KYUN MERE MAN,
CHINTA ME HAI KYUN HE MERE PRAAN – (2)
- PRABHU KE SHARAN ME JO BHI AYENGE,
DOSHI NA TAHRENGE – (2)
BACHAYEGA, BADHAYEGA,
BALWAN BANAYEGA – (2)
VYAKUL … - PRABHU KEHTА HAI DAS TU HАI,
MITRA BHI TU HI HAI – (2)
CHUNKAR TUJHKO USNE BULAYA,
KABHI NAHI TAJEGA – (2)
TUJHE KABHI NAHI TAJEGA … - NIRBHAY HOKAR TUJHE KAHNA HAI,
PRABHU HAI SAHAYAK MERA – (2)
TUM NA DAROGE TERE,
VIRODHI KYA KAR SAKTE HAI – (2)
TUJHE KYA KAR SAKTE HAI …
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